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हरित पट्टी

एमआरपीएल ने समग्र रिफाइनरी के इर्द-गिर्द हरित पट्टी बनाई है. हरित पट्टी में ऐसे पेड़-पौधे लगाए हैं जिनको स्थानीय फुलवारी के अनुरूप खास तौर से पसंद किया गया है. कुछ प्रजातियां तो जैव-सूचक की भांति काम आएगी एसी संभावना है. रिफाइनरी के इर्द-गिर्द हरित पट्टी बनाने के लिए एमआरपीएल ने एक व्यापक कार्यक्रम घोषित किया है.

हरित पट्टी की ज़रूरत

हरियाली के भीतर रसद

हरित पट्टी बनाने का खास मक़सद है, अस्थाई उत्सर्जन या बहिस्राव को कम करना, भू-क्षरण नियंत्रित करना, व्यर्थ जल का उपयोग करना, ध्वनि प्रदूषण रोकना और रिफाइनरी का खूबसूरत नज़ारा रमणीय बनाना.

पौधों की नस्लों का चयन करते समय यह देखा गया कि वे स्थानीय स्थिति के अनुरूप ढाल पाएंगे या नहीं और साथ ही NEERI की सिफारिशों पर गौर किया गया. पौधों की प्रजातियों में नीचे उल्लिखित गुणधर्म होने चाहिए:

  1. तेजी से उगने वाली बड़ी सदाबहार छतरी की चादर, बड़ी-बड़ी पत्तियाँ और प्रदूषकों के प्रति प्रतिरोधक शक्ति होनी चाहिए.
  2. क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए कृषि भूमि की आबो हवा के अनुकूल होनी चाहिए
  3. आम और शीशम जैसी प्रजातियों को प्रदूषण के संभावित जैवी सूचकों के रूप में शामिल करना होगा.

50 से अधिक प्रकार के पौधे जो स्थानीय आबो हवा के अनुकूल हों, हरित पट्टी में लगाए गए हैं. बबूल, बहुनिया, काजू, क्या ज़ुरीना, नीलगिरी, ग्लरीसिडिया, गुलमोहर, होपिया, कटहल, महागोनी, आम, पेट्रोफोरम, वर्षा पेड़,रीठा,रगतूरा, इमली, सागौन, वेटिरिया जैसी कुछ प्रजातियां इस इलाके में दिखाई देती हैं.