इतिहास

इतिहास

ओएनजीसी द्वारा मार्च 2003 में अधिग्रहण करने से पहले यह सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी मेसर्स हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) तथा मेसर्स आईआरआईएल एण्ड एसोसिएट्स (एवी बिरला ग्रुप) द्वारा प्रवर्तित संयुक्त उद्यम ऑइल कंपनी थी। एमआरपीएल की स्थापना 1988 में की गई थी जिसकी प्रारंभिक प्रोसेसिंग क्षमता प्रतिवर्ष 3.0 मिलियन मेट्रिक टन थी। जिसे बढा़कर वर्तमान में 15 मिलियन मेट्रिक टन प्रतिवर्ष किया गया। रिफाइनरी ने 24 से 46 एपीआई ग्रैविटी वाले लाइट से भारी तथा सोर से स्वीट क्रूडों को प्रोसेस करने की क्षमता युक्त मिडिल डिस्टलेटों को बढ़ाने की दिशा में कल्पना की। 28 मार्च 2003 को ओएनजीसी ने ए.वी.बिरला की पूरी हिस्सेदारी (शेयर होल्डिंग) को अधिग्रहीत कर लिया । इसके अतिरिक्त रु.600 करोड़ की इक्विटी पूंजी लगाई। इस तरह से एमआरपीएल, ओएनजीसी का अधिकतम शेयरधारण वाली सहायक कंपनी बन गई। ऋणदाता भी ओएनजीसी द्वारा प्रस्तावित ऋण पुनर्संरचना पैकेज हेतु सहमत हो गए। जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ उनके ऋणों का रु.365 करोड़ तक का इक्विटी में परिवर्तन शामिल था। कालान्तर में ओएनजीसी की एमआरपीएल में 71.62 प्रतिशत की हिस्सेदारी बढ़ाने हेतु ओएनजीसी ने डीआरपी के अनुसरण में ऋणदाताओं को आबंटित इक्विटी अधिग्रहीत कर ली।