पूरी की गई परियोजनाएं

तीसरे चरण के तहत रिफाइनरी उन्नयन और विस्तार परियोजना:

तीसरे चरण के तहत आरंभ की गई रिफाइनरी उन्नयन और विस्तार परियोजना की सभी माध्यमिक प्रक्रिया इकाइयों को सितंबर 2014 में पूरा कर लिया गया, इन इकाइयों के प्रयोग में आने से आसुत उत्पादों में वृद्धि तथा प्रोपलीन एवं कम लागत वाले क्रूड ऑयल से पेट्रोल इत्यादि उच्च मूल्य के उत्पादों का उत्पादन होगा। क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (CDU) हाइड्रोजन उत्पादन इकाई (HGU) और डीजल जलोपचारक यूनिट (DHDT) को पिछले वित्त वर्ष में चालू किया गया था।

रिफाइनरी अब न केवल इस उन्नयन और विस्तार के फलस्वकरुप सबसे कठिन क्रूड 18 एपीआई (मिश्रित) से 46 एपीआई और हल्के से भारी क्रूड अथवा स्वीट क्रूड से सोर क्रूड तक के प्रसंस्करण में सक्षम हो गई है बल्कि हाईटैन क्रूड को भी प्रोसेस करने में सक्षम हो गई है ।

सिंगल प्वाइंट मूरिंग (एसपीएम) :

एमआरपीएल ने अनुमानित 1044 करोड़ रुपए की लागत से 30 मीटर ड्राफ्ट युक्त वेरी लार्ज क्रूडकैरियर (वीएलसीसी) से लदान एवं उतराई के लिए बंदरगाह की सीमा के तट से 16 किमी दूर तटीय बूस्टर पम्पिंग स्टेशन के साथ साथ युक्त मूरिंग की स्थापना की है। दिनांक 29.08.2013 को क्रूड वेजल रत्न-पूजा के मार्फत पहली बार 87 टीएमटी क्रूड ऑयल उतारने के साथ ही एसपीएम को सफलतापूर्वक कमीशन किया गया।

इस सुविधा के बल पर कंपनी सुएज मैक्स एवं वीएलसीसी जहाजों के मार्फत कच्चे तेल को आयात करने में सक्षम हो गई है, फलस्वरूप जहाजों के किराये भाड़े की दर में भी कंपनी को आर्थिक राहत प्राप्त होगी। इसके अलावा, इससे पश्चिम अफ्रीकी और लैटिन अमेरिकी देशों से क्रूड मंगवाने में भी मदद मिलेगी। इस सुविधा से नव मंगलूर पोर्ट में मौजूदा बर्थ पर भीड़ भाड़ को न केवल कम करने में इससे मदद प्राप्त होगी बल्कि विलंब शुल्क में भी कमी आएगी।

पॉलीप्रोपाइलीन यूनिट:

लगभग 1,804 करोड़ रुपये की लागत से लाइसेंसर मेसर्स नोवोलेन टेक्नालॉजी, जर्मनी के साथ फेज 3 के तहत पोलीप्रोपलीन यूनिट अधिष्ठापित की गई है। 01.03.2015 को फीड इन हासिल किया गया तथा माननीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, स्वतंत्र प्रभार के द्वारा दिनांक 05.04.2015 को पोलीप्रोपलीन यूनिट का उद्घाटन किया गया, जिसका वाणिज्यिक उत्पादन दिनांक 18.06.2015 से आंरभ किया गया।